जनपद अध्यक्ष ने गुणवान ने कहा कलेक्टर कार्यवाही कर बर्खास्त करें
आष्टा/कमल पांचाल
सिविल अस्पताल में आयुष्मान योजना के इनसेंटिव में हुए 46 लाख रुपए के मामले को उजागर हुए डेढ़ माह से ज्यादा का समय बीत चुका है जबकि भ्रष्टाचार के सबूत सीधे सीधे पूरी कहानी बयां कर रहा है इसके बावजूद अब तक आयुष्मान योजना के इनसेंटिव में भ्रष्टाचार करने वाले आरोपियों पर कोई भी ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है ऐसे में अंदाजा लगा सकते हैं आष्टा में भ्रष्टाचारियों के हौसले कितने बुलन्द हैं और वही जिले का स्वास्थ्य विभाग भी कार्यवाही करने की बजाय जांच के नाम पर लीपापोती करने में जुटा हुआ है जिससे अब सीहोर के स्वास्थ विभाग में बैठे अफसरों की नियत पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं और सवाल उठ रहे हैं कि क्या भ्रष्टाचार में शामिल अपने इन गुर्गो को बचाने के प्रयास कर रहे हैं जिम्मेदार स्वास्थ विभाग के अफसर..?
गौरतलब है कि सिवाय अस्पताल में पदस्थ सेवा निवृत शिशुरोग विशेषज्ञ डॉक्टर एके जैन की शिकायत के बाद 27 जनवरी को उजागर हुए आयुष्मान योजना के इनसेंटिव घोटाले में 6 फरवरी को आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग के महाप्रबंधक डॉक्टर नरेंद्र भयडीया ने सीहोर स्वास्थ विभाग को जांच कर कार्यवाही के निर्देश दिए थे।
लिहाजा स्वास्थ विभाग ने आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग के आदेश पर 10 फरवरी को 6 सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया था।
लिहाजा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया के द्वारा गठित टीम को डेढ़ माह से ज्यादा का समय बीतने को है लेकिन जांच टीम अब तक आरोपियों के बयान तक दर्ज नहीं कर पाई है जिससे आप समझ सकते हैं कि जांच टीम इस मामले पर कितनी गंभीर है
डेढ़ माह बीतने को नहीं सौंप पाये जांच रिपोर्ट, जांच टीम की नियत पर उठे सवाल
10 फरवरी को गठित 6 सदस्यीय जांच टीम में शामिल सिविल सर्जन डॉक्टर उमेश श्रीवास्तव, डॉक्टर अंकित चांडक, श्री मति क्षमा बर्वे, डॉक्टर सोनल डागा, रवि जैन सहित अर्जुन सूखेजा अब तक जांच के नाम लीपापोती करते हुए नजर आ रहे हैं और कछुए की चाल की तरह डेढ़ माह में 46 लाख रुपए के घोटाले का जांच प्रतिवेदन भेजना तो दूर की बात है अब आरोपियों के बयान तक दर्ज नहीं करा पाए है ऐसे में जांच टीम की नियत और कार्यप्रणाली भी संदिग्ध नजर आती है।
जिनके खातों में पहुंची आयुष्मान की राशि उन पर स्वास्थ विभाग की मेहरबानी

आयुष्मान योजना इनसेंटिव में हुए 46 लाख रुपए के घोटाले की जांच कर रही टीम ने 6 मार्च को घोटाले से जुड़े सभी लोगों को बयान के लिए बुलाया था जिसमें तत्कालीन बीएमओ प्रवीर गुप्ता, डॉक्टर जीडी सोनी, डॉक्टर एसके माहौर,स्टाफ नर्स और मुख्य आरोपी प्रमोद परमार,जगदीश मेवाड़ा के बयान सहित बैंक स्टेटमेंट लिया गया था लेकिन आयुष्मान योजना इनसेंटिव की राशि प्रमोद परमार ने अपने जिन रिश्तेदारों पत्नी दीक्षा परमार,कांता परमार,बबीता परमार, शुभम के खातों में ट्रांसफर की थी उनके बयान तक जांच टीम लेने का सामर्थ नहीं जुटा पाई। जिसके बाद जांच कर्ता स्वयं जांच के कटघरे में नजर आते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी भी नजर आती है
कलेक्टर को तत्काल दोषियों पर कार्रवाई करना चाहिए- जनपद अध्यक्ष

इस मामले पर जनपद अध्यक्ष दीक्षा सोनू गुणवान ने कहा कि आयुष्मान योजना हमारी केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना है जिस तरह से आष्टा के सिविल अस्पताल में वही के अधिकारी और कर्मचारीयो ने 46 लाख से अधिक का घोटाला किया है ऊपर से अब तक कार्यवाही न होने से हमारी सरकार की छवि धूमिल होती है इस मामले को डेढ़ माह से अधिक हो चुका है दोषियों पर कार्यवाही के नाम पर डेढ़ माह से सिर्फ जांच की जा रही है जबकि घोटाले करने वाले अब तक वही पर काम कर रहे हैं ऐसे में कैसे निष्पक्ष कार्यवाही हो सकती है इस मामले पर सीहोर कलेक्टर को संज्ञान लेना चाहिए और दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर नौकरी से बर्खास्त करना चाहिए। यदि जरूरत पड़ी इस मामले पर उच्च अधिकारियों या विभागीय मंत्री से चर्चा करुँगी।
दो बार किए नोटिस जारी, लेकिन नहीं पहुंचे बयान देने, एक सप्ताह में सौंपेगे जांच रिपोर्ट-सिविल सर्जन
जांच टीम को लीड कर रहे हैं सिविल सर्जन डॉक्टर उमेश श्रीवास्तव ने बताया कि जिनके खातों में आयुष्मान योजना इनसेंटिव की राशि ट्रांसफर हुई थी उनमें दीक्षा परमार ,कांता परमार, बबीता परमार,शुभम परमार को बैंक खातों के स्टेटमेंट के साथ उपस्थित होने का नोटिस जारी किया गया था लेकिन यह अब तक उपस्थित नहीं हुए हैं और हम एक सप्ताह में जांच प्रतिवेदन बनाकर सौंपने वाले हैं
जिनके खातों में पहुंची राशि उन्हें दिए थे नोटिस- बीएमओ अमित माथुर
आष्टा बीएमओ डॉक्टर अमित माथुर ने बताया कि आयुष्मान योजना इनसेंटिव की राशि दीक्षा परमार,कांता परमार,बबीता परमार के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी जिन्हें पहला नोटिस 6 मार्च को और दूसरा नोटिस 13 मार्च को बैंक स्टेटमेंट के साथ उपस्थित होने का जारी किया गया था।









