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आयुष्मान घोटाला – दो महीने बाद जांच के निष्कर्ष पर पहुंची जांच टीम,CS सोमवार को सौंपेगे जांच रिपोर्ट

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6 सदस्यीय जांच दल जांच के निष्कर्ष पर पहुंचा,लेकिन मीडिया से जानकारी छुपाने में जुटे सिविल सर्जन

आष्टा/कमल पांचाल
सिविल अस्पताल में आयुष्मान योजना इनसेंटिव में 46 लाख रुपए से अधिक के घोटाले के उजागर हुए 2 माह बीत चुके हैं ऐसे में अब जाकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा गठित जांच टीम अपनी जांच के निष्कर्ष पर पहुंच चुकी है और सोमवार को आयुष्मान घोटाले की जांच रिपोर्ट को यह जांच टीम सौंपने जा रही हैं लिहाजा डेढ़ महीने तक चली लंबी और बारीकी से हुई जांच के निष्कर्ष को जांच टीम को लीड कर रहे सिविल सर्जन डॉक्टर उमेश श्रीवास्तव मीडिया से साझा करने से कतरा रहे हैं और मीडिया को जांच निष्कर्ष नहीं बता रहे हैं ऐसे में जांच टीम की नियत भी कठघरे में खड़ी होती है और सवाल खड़े होते हैं कि क्या वाकई में इन जांच कर्ताओं ने पूरी ईमानदारी से जांच की होगी या फिर लीपापोती कर मामले के आरोपियों को बचाने का काम किया है।
खेर डेढ़ महीने तक चली जांच अपने अंतिम मुकाम तक पहुंच चुकी है अब सोमवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया को यह जांच रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी।
फिर आगे की पटकथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया द्वारा लिखी जाएगी और सुधीर डहरिया की कारगुजारियां नर्सिंग घोटाले से लेकर जिले के निजी अस्पतालों को दी गई मान्यताओं पर उजागर हो चुकी है ऐसे में अब भी घोटाले के आरोपियों पर कार्यवाही न होने से सुधीर डहरिया की संदिग्ध भूमिका स्पष्ट नजर आती है।

यह है पूरा घोटाला जिसे दबाने का किया जा रहा है प्रयास

आष्टा के सरकारी अस्पताल में केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि में हुए 46 लाख रुपए से अधिक के बड़े घोटाले के सामने आने के दो माह बाद भी भ्रष्ट आरोपियों पर नाही अब तक पुलिस में अपराधिक मामला दर्ज किया गया है नाही अब तक नौकरी से बर्खास्त किया गया है और कार्यवाही के नाम पर सिर्फ जांच चल रही है।
लिहाजा जिससे भ्रष्ट स्वास्थ्य विभाग भी अपने इन छोटे से प्यादे को बचाने का प्रयास कर बड़ी मछलियों को बचाकर उनके कांडों को छुपाना चाहता है
गौरतलब है कि सिविल अस्पताल में पदस्थ फार्मासिस्ट स्टोर इंचार्ज प्रमोद परमार ने वर्ष 2017-18 से लेकर वर्ष 2023 तक सिविल अस्पताल में ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को मिलने वाले इनसेंटिव को गलत तरीके अपने रिश्तेदारों के खातों में डालकर 46 लाख रुपए से अधिक का घोटाला कर डाला था।
लेकिन तत्कालीन शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एके जैन की लिखित शिकायत के बाद इस भ्रष्टाचार की पोल खुल गई। लेकिन इसके बाद से जिले का भ्रष्ट स्वास्थ विभाग आयुष्मान भ्रष्टाचार में शामिल आरोपियों पर कार्यवाही करने की बजाय बचाने में जुटा हुआ है ऐसे में अब भी आयुष्मान योजना इनसेंटिव घोटाले के किसी भी आरोपी पर कोई भी वैधानिक कार्यवाही देखने को नहीं मिली है

आयुष्मान भारत नीरामयम के महाप्रबंधक ने दिए थे जांच के आदेश

आपको बता दें की आयुष्मान योजना के इनसेंटिव की शिकायत सेवा निवृत शिशुरोग विशेषज्ञ डॉक्टर एके जैन ने 27 जनवरी को लिखित में स्थानीय बीएमओ को दर्ज कराई थी। इसके बाद बीएमओ अमित माथुर ने 31 जनवरी को आनन फानन में जिला स्वास्थ विभाग को पत्र लिखकर अवगत कराया।
जिसके बाद 2 फरवरी को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया ने आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग भोपाल को पत्र लिखा, इसके बाद 6 फरवरी को आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग भोपाल के महाप्रबंधक डॉक्टर नरेंद्र भयडीया ने सीहोर स्वास्थ विभाग को जांच के आदेश जारी किए , ऐसे में आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग भोपाल से आदेश जारी होते ही जिला स्वास्थ विभाग ने भी जोहमत उठाते हुए 10 फरवरी को 6 सदस्यीय जांच टीम गठित करने के आदेश जारी किए। लिहाजा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा गठित जांच टीम ने 13 फरवरी को सिविल सर्जन डॉक्टर उमेश श्रीवास्तव के नेतृत्व में जांच का खेल शुरू कर दिया।

फार्मासिस्ट और आयुष्मान मित्र ने 46 लाख रुपए से ज्यादा अपने करीबी रिश्तेदारों के बैंक खातों में किये थे ट्रांसफर

सिविल अस्पताल में पदस्थ फार्मासिस्ट स्टोर इंचार्ज प्रमोद परमार ने गलत तरीके से आयुष्मान योजना के इनसेंटिव को अपनी पत्नी दीक्षा परमार सहित अपने करीबी रिश्तेदार कांता परमार , शुभम परमार, बबीता परमार के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया और यह राशि 27 लाख रुपए से अधिक की है वही एक और आरोपी जगदीश मेवाड़ा ने भी आयुष्मान योजना इनसेंटिव को अपने खातों में ट्रांसफर कर डाला है जिसमें 18 लाख रुपए से ज्यादा की राशि शामिल है जगदीश मेवाड़ा ने अलग अलग बैंक खातों में इन राशियों को ट्रांसफर किया है और इसमें 55000 हजार की राशि अपनी पत्नी सागर मेवाड़ा के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की है

1000 से ज्यादा पन्नों में निकाले बैंक स्टेटमेंट, रिश्तेदारों ने नहीं दिए बयान

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया द्वारा गठित 6 सदस्यीय जांच टीम ने 6 मार्च को घोटाले से जुड़े आरोपियों सहित जिनके बैंक खातों में राशि ट्रांसफर हुई उनको पत्र जारी कर बयान और बैंक स्टेटमेंट के दस्तावेज उपलब्ध कराने का पत्र जारी किया था लेकिन सिर्फ प्रमोद परमार और जगदीश मेवाड़ा ने ही अपने बयान दर्ज कराए वही जिनके खातों में राशि ट्रांसफर हुई थी उन खाता धारकों ने नाही अपने बयान दर्ज कराए नाही बैंक स्टेटमेंट उपलब्ध कराए।
आपको बता दें कि आयुष्मान योजना इनसेंटिव की 46 लाख रुपए की राशि प्रमोद परमार, जगदीश मेवाड़ा ने अपने बैंक खातों सहित अपने करीबी रिश्तेदारों जिनमें दीक्षा परमार, कांता परमार, बबीता परमार, शुभम परमार, सागर मेवाड़ा के बैंक खातों में ट्रांसफर कर डाली थी।

इनका कहना
सिविल अस्पताल में आयुष्मान योजना इनसेंटिव में 46 लाख रुपए के हुए घोटाले की जांच पूरी कर ली गई है और हम जांच के निष्कर्ष पर पहुंच गए हैं सोमवार को हम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया को यह जांच रिपोर्ट सौंपेगे ।अभी हम आपको जांच का निष्कर्ष नहीं बता सकते हैं

जांच कर्ता – सिविल सर्जन डॉक्टर उमेश श्रीवास्तव

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