Shopping cart

TnewsTnews

सीहोर में सरकारी सिस्टम बना मजाक,4 माह बाद भी आयुष्मान घोटाले के आरोपियों पर नहीं हुई कार्यवाही,MP के दो दिग्गज मंत्रियों की साख पर लग रहा है बट्टा

Email :

सीहोर/कमल पांचाल
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे पूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर जिले में सरकारी सिस्टम मजाक बन कर रह गया है आलम यह है कि केंद्र की आयुष्मान योजना को लूटने वाले सरकारी भ्रष्टाचारियों पर 4 माह बाद भी एफआईआर तो दूर की बात विभागीय कार्यवाही करने की हिम्मत भी जिला प्रशासन नहीं जुटा पा रहा है जिससे एक तरफ तो ईमानदारी से कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है तो दूसरी और भ्रष्टाचार करने वाले सरकारी दीमको के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं ऐसे में आयुष्मान घोटाले के आरोपियों पर अब तक कार्यवाही नहीं होने से सीहोर जिले में आमजन चोक चौराहों पर जिले के सरकारी सिस्टम का सरकारी अधिकारियों पर सरकारी सिस्टम का मजाक उड़ाने की बातें करते हुए नजर आ रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री से लेकर केबिनेट मंत्री तक का गृह जिला, लेकिन फिर भी भ्रष्टाचार चरम पर

राजधानी भोपाल से सटा सीहोर जिला जहां एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का गृह जिला कहा जाता है वह का सरकारी सिस्टम किस कदर मजाक बना हुआ है इसकी बानगी सीहोर के आष्टा में हुए 46 लाख से अधिक के आयुष्मान घोटाले के मामले सामने आई है जहां 3 महीने तक चली 6 सदस्यीय टीम की निष्कर्ष जांच रिपोर्ट में स्वास्थ विभाग के अधिकारी, कर्मचारी दोषी पाये जाने के बावजूद 4 माह बाद भी अब तक कार्यवाही नहीं हुई है जिससे जहां एक तरफ सरकार की छवि धूमिल हो रही है तो वही सीहोर जिले के दोनों दिग्गज मंत्रियों की साख पर भी बट्टा लग रहा है।

स्वास्थ विभाग के कई बड़े अधिकारी और कर्मचारीयो घोटाले में शामिल!

आयुष्मान विभाग के आदेश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया द्वारा गठित 6 सदस्यीय जांच टीम ने 3 महीने की लंबी पड़ताल में बारीकी से की जांच रिपोर्ट को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया के सामने पेश की थी।
जिसके बाद स्वास्थ विभाग और सीहोर कलेक्टर की कार्यवाही का इंतजार किया जा रहा था लेकिन फिर भी कार्यवाही नहीं होने पर सीहोर के कांग्रेस नेता ने सूचना के अधिकार के तहत जांच रिपोर्ट प्राप्त की जिसमे उक्त जांच रिपोर्ट के कई चौंकाने वाले खुलासे देखने को मिले हैं उक्त जांच टीम की निष्कर्ष रिपोर्ट में स्वास्थ विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारीयो की इस आयुष्मान घोटाले में भूमिका सामने आई है वही 6 सदस्यीय जांच टीम की निष्कर्ष रिपोर्ट में सीधे सीधे स्वास्थ विभाग के तत्कालीन तीन बीएमओ, तत्कालीन लेखापाल और सिविल अस्पताल के फार्मासिस्ट स्टोर इंचार्ज प्रमोद परमार, आयुष्मान मित्र जगदीश मेवाड़ा और 2 अन्य लोगों की 46 लाख रुपए के आयुष्मान घोटाले में भूमिका सामने आई है वही जांच टीम ने उचित कार्यवाही का भी निष्कर्ष रिपोर्ट में उल्लेख किया है लेकिन 4 माह बाद भी भी कार्यवाही नहीं होना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया की संलिप्तता को भी उजागर करता है

आरटीआई में खुलासा,तत्कालीन बीएमओ और संविदा कर्मचारी की मिलीभगत से हुआ 46 लाख का आयुष्मान घोटाला, जांच में आरोप सिद्ध हुए

सेवादल कांग्रेस के जिलाध्यक्ष नरेन्द्र खंगराले ने कार्यालय सिविल अस्पताल आष्टा से आयुष्मान भारत निरामायम योजना अन्तर्गत प्रोत्साहन की राशि सन 2018 से 2025 तक के भुगतान/वितरण की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत् प्राप्त की थी। जिसमें उक्त राशि जो लगभग 46 लाख के करीब है। उसके स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत डॉक्टरों व विभाग के अन्य कर्मचारियों के बीच प्रोत्साहन के रूप में वितरण की जानी थी। उक्त राशि निरामायम योजना के समय-समय पर प्रभारी रहे चेकर एवं मेकर डॉ.प्रवीर गुप्ता, डॉ.सुरेश कुमार माहोर, डॉ.जी.डी सोनी एवं श्री एम.एल.वर्मा की आईडी तथा पासवर्ड से संविदा कर्मचारी प्रमोद परमार, जगदीश मेवाड़ा द्वारा उनके रिस्तेदार कान्ता परमार, दिक्षा परमार, बविता परमार, शुभम परमार एवं जगदीश मेवाड़ा, सागर मेवाड़ा द्वारा राशि इनके स्वयं के सम्बंधितों के बैंक खाते में ट्रांसफर कर आष्युमान योजना की राशि बंदरबाट कर निकालकर हड़प की जा चुकी है। उक्त जानकारी खंगराले द्वारा आरटीआई के तहत् प्राप्त की गई है, जिसमें सीएमएचओ डेहरिया द्वारा छ: सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट भी प्राप्त हुई है। समिति की रिपोर्ट के लेख में 46 लाख के गवन के प्रकरण में कोई कार्यवाही नही होना यह दर्शाता है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की भाजपा सरकार में जिले में भ्रष्टाचार खूब फलफूल रहा है और दोषियों पर कोई कार्यवाही नही कि जाना वरिष्ठ अधिकारियों को संदेह गेहरे में लाता है। जबकि छ: सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट जिले के कलेक्टर को भी सौंपी जा चुकी है।

उपमुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत, दोषियों को बर्खास्त कर FIR की मांग

खंगराले द्वारा प्रकरण में राजेन्द्र शुक्ला उप मुख्यमंत्री तथा मंत्री लोक स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण विभाग, राज्यसभा के वरिष्ठ सांसद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रमुख सचिव संदीप यादव, आयुक्त तरूण भाटी, संचालक मलिका निगम नागरे, दिनेश श्रीवास्तव एवं कलेक्टर सीहोर की जनसुनवाई में जिला पंचायत सीहोर को मांग पत्र सौंप कर दोषियों पर एफआईआर एवं उनकी सेवाऐं समाप्त कर जैल भेजने की मांग की गई है। साथ ही सेवादल कांग्रेस अध्यक्ष नरेन्द्र खंगराले ने चैतावनी भी दी है कि यदि शीघ्र दोषियों पर कार्यवाही नही हुई तो कलेक्टर कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन किया जावेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts

Translate »
error: Content is protected !!