Shopping cart

बाबा का देश India बाबा का प्रदेश MP बाबा की - राजनीतिक खबरें बाबा विशेष

सुनो धर्म के ठेकेदारों,वर्षो पुरानी परंपराओ को तोडना बर्दास्त नहीं,धर्म तुम्हारे अकेले की जागीर नहीं, आयोजन समिति पर भड़के लोग, सोशल मीडिया पर निकल रहा है गुस्सा

Email :

आष्टा/कमल पांचाल
प्रतिवर्ष अनुसार इस बार भी असत्य पर सत्य की जीत, बुराई पर अच्छाई का, अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतिक दशहरा पर्व को धूमधाम से मनाने के लिए कई दिनों से तैयारियां की जा रही है और स्वाभाविक है सनातन धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है इस दिन प्रभु श्री राम ने लंकापति रावण का वध कर धर्म और सत्य की विजय पाताका लहराई थी!
इसलिए सम्पूर्ण भारत वर्ष में यह दशहरा का पावन और पवित्र पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है और यही परंपरा आष्टा में भी वर्षो से चली आ रही है लेकिन इस वर्ष स्वयं की वाहवाही के चक्कर में दशहरे पर चली आ रही परंपराओ को न बल्कि तोड़ा गया बल्कि एक धार्मिक आयोजन को राजनीति की भेंट चढ़ाने से भी आयोजक नहीं चुके!.

जिसके चलते लोगों में सोशल मिडिया से लेकर चौक चौराहो पर आक्रोश और गुस्सा देखा गया और आयोजन समिति सहित धर्म के ठेकेदारों को कोसते हुए नजर आये!
आपको बता दें की इस दशहरे पर पब्लिक का गुस्सा सोशल मीडिया पर खूब फूट रहा है जिसका सबसे बड़ा कारण एक अच्छे खासे धार्मिक आयोजन को स्वयं की महत्वाकांक्षी अति लालसा के चलते राजनीति की भेंट चढ़ा देना नजर आया। लाजमी है ऐसे हालत में इस दशहरा पर आयोजन समिति और धर्म के ठेकेदारों द्वारा कई बड़ी गलतियां या कहे चूक नजर आई जिससे सनातन प्रेमी सोशल मीडिया पर लिखने से नहीं नहीं चूक रहे हैं गौरतलब है कि दशहरे के चल समारोह में आकृषण का केंद्र रहने वाले प्रभु श्री राम स्वयं अपने ही विजयी जुलुस(शोभायात्रा) में विशेष बग्गी या विशेष साज सज्जा से सुसज्जित रथ में बैठे होने की बजाय बिना साज सज्जा के एक छोटे से साधारण बग्गी संग लक्ष्मण और हनुमान के साथ बैठे हुए थे। जो काफी तकलीफ और पीड़ा दायक था क्योंकि पूरी शोभायात्रा के केंद्र बिंदु आकर्षण श्री राम, सीता मैय्या, श्री लक्ष्मण, हनुमान जी होते हैं ऐसे में इनकी बग्गी को ही दरकिनार कर अन्य बेवजह की चीजों पर ध्यान देना कहीं न कहीं एक बड़ी चूक कहा जा रहा है जो इस शोभायात्रा को फीका कर रहा था । वही दूसरी और दशहरा मैदान की एक फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें श्री राम और लक्ष्मण जी मुख्य मंच के सामने जमीन पर लगी कुर्सियों पर बैठे नजर आए तो शहर के प्रभावशाली लोग मंच पर ठाठ से बैठे नजर आए जिससे सनातन धर्म को मानने वाले लोग और भड़क गए हैं और सोशल मीडिया जमकर भड़ास निकाल रहे हैं।

राजनीति की भेंट चढ़ाया, एक घंटे लेट हुआ रावण दहन, बिना देखे लौटे लोग

वर्षो से चली आ रही परंपराओं को भी इस बार तोडा गया और नई राजनीतिक परंपराओं की शुरुआत की गई जिसे हिंदू धर्म के मानने वालों ने खुलकर विरोध किया और सोशल मीडिया पर अपने गुस्से को निकालते हुए नजर आए।
दरअसल वर्षो परंपरा अनुसार मुख्य दशहरा मैदान पर 7 बजे प्रभु श्री राम के द्वारा रावण दहन किया जाता रहा है लेकिन इस बार पूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान केंदीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र युवराज कार्तिकेय सिंह चौहान बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे।
ऐसे में आयोजकों ने 7 बजे रावण दहन की जगह 8 बजे कार्तिकेय चौहान के द्वारा रावण दहन करवाया ।जिससे काफी देर तक परेशान होने के बाद कई लोग बिना रावण दहन देखे अपने बच्चों के साथ वापस लौट गए और आयोजकों को जमकर कोस रहे हैं कि धार्मिक आयोजन को राजनीति की भेंट चढ़ाना कितना उचित है..?
इस दौरान इस पर दशहरे में कई चूक, कई बड़ी गलतियां भी की गई और इसका सबसे कारण उन वरिष्ठ समाजसेवीयो को भी दरकिनार करना जो जो कई वर्षों से अपने उम्र दराज अनुभव से दशहरा समिति का उचित दिशा निर्देश देते आए हैं लेकिन इस बार ऐसे वरिष्ठ समाजसेवी भी नजर अंदाज नजर आए और झूठी वाहवाही बटोरने वाले कथित समाजसेवी अपनी पीठ थपथपाने के लिए आगे आगे नजर आए जिसके चलते अब आयोजकों के साथ धर्म के ठेकेदारों की फजीहत और किरकिरी हो रही है
इस दौरान सनातन प्रेमीयो का यह भी कहना है की यदि इतने बड़े आयोजन दशहरे की बागडोर एक युवा को दी गई थी तो जिम्मेदारों हिन्दू उत्सव समिति, सकल समाज को आगे रहकर दशहरे की छोटी बड़ी व्यवस्था को इस युवा के साथ संभालना था और परंपराओं को तोड़ने की बजाय उसे बनाए रखने पर इस युवा को निर्देश देना था नाकि जिम्मेदारी से भाग कर कई लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करवाना था।

अलीपुर में भी हुआ देरी से रावण दहन, नहीं पहुंचे कार्तिकेय

आष्टा में मुख्य दशहरा मैदान पर रावण दहन के बाद अलीपुर में भी कार्तिकेय चौहान को रावण दहन कार्यक्रम में शामिल होना था लेकिन आष्टा में रावण दहन एक घंटा देरी से होने पर सोशल मीडिया पर पब्लिक अपना गुस्सा निकाल रही थी।
ऐसे में अलीपुर समिति ने समय की नजाकत को भांपते हुए कार्तिकेय चौहान के पहुंचने से पहले ही रावण दहन कर डाला। जिससे अलीपुर दशहरा समिति की फजीहत होने से भी बच गई। ऐसे में अब शहर के नागरिक कह रहे की धर्म किसी की जागीर नहीं है इसलिए परंपराओ को तोड़ना बिल्कुल बरदाश्त नहीं किया जा सकता है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts

Translate »
error: Content is protected !!