आयुष्मान विभाग ने जिला स्वास्थ विभाग को स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के दिए सख्त निर्देश
आयुष्मान भारत विभाग के महाप्रबंधक ने लिखा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र
आष्टा/कमल पांचाल
सिविल अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को मिलने वाले आयुष्मान योजना के ईइंसेंटिव में हुए 46 लाख रुपए से अधिक के घोटाले की आग अब मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गई है लिहाजा केंद्र से जुड़ी इस योजना में इतने बड़े स्तर पर हुए भ्रष्टाचार की जांच के आदेश आ गए हैं और अब इस जांच टीम के आष्टा के सिविल अस्पताल में दस्तक देने का इंतजार हो रहा है गौरतलब है कि सिविल अस्पताल आष्टा में डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों सहित अन्य स्टाफ कर्मियों को मिलने वाले आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि (इनसेंटिव ) में 46 लाख से अधिक का घोटाला किया गया है और सूत्रों मिली जानकारी अनुसार सिविल अस्पताल में पदस्त स्टोर इंचार्ज प्रमोद परमार ने आयुष्मान मित्र जगदीश मेवाड़ा के साथ मिलकर अस्पताल के तत्कालीन लेखापाल एमएल वर्मा ने इंसेंटिव के असल हकदार डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों के बैंक खातों की बजाय अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर डाले है और यह मामला वर्ष 2017-18 से लेकर वर्ष 2023 तक है ऐसे में यह घोटाला सेवा निवृत शिशुरोग विशेषज्ञ डॉक्टर एके जैन की लिखित शिकायत के बाद उजागर हुआ है ऐसे में अब जिले के स्वास्थ विभाग में हड़कंप मचा हुआ है वहीं आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग के महाप्रबंधक जारी पत्र से पूरे मामले एक और खुलासा हुआ है जिसमे शिकायत कर्ता सेवा निवृत शिशुरोग विशेषज्ञ डॉक्टर एके जैन पर भी अनियमितता का उल्लेख किया गया है जिससे इस पूरे घोटाले की जड़ कई वरिष्ठ डॉक्टरों से जुड़ी हुई नजर आ रही है लिहाजा धीरे धीरे यह स्पष्ट है कि इस मामले प्रमोद परमार और जगदीश मेवाड़ा तो एक मोहरा मात्र नजर आते हैं लिहाजा इन दोनों के पीछे बड़ी मछलियों के शामिल होने की पूरी संभावना है यदि आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग ने निष्पक्ष और ईमानदारी से जांच की तो निश्चित ही बड़े बड़े लोगों के चेहरे बेनकाब होंगे!
आयुष्मान भोपाल के महाप्रबंधक ने दिखाई सख्ती, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के दिए आदेश, एक सेवा निवृत डॉक्टर का नाम भी सामने आया
सिविल अस्पताल आष्टा में आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि (इनसेंटिव) में हुए घोटाले पर आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग ने सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है और आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग के महाप्रबंधक डॉक्टर नरेंद्र भयडीया ने दिनांक 2 फरवरी को सीहोर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र जारी कर आयुष्मान निरामयम् प्रोत्साहन योजना अंतर्गत अनियमितताओ की जांच समिति गठित कर कार्यवाही के आदेश दिए हैं। उपरोक्त पत्र में उल्लेख किया गया है कि सिविल अस्पताल, आष्टा में पदस्थ डॉ. ए.के. जैन सहित अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा आयुष्मान निरामयम् प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत शासकीय राशि के भुगतान में गंभीर अनियमितताएँ की गई है, जिनमें पात्र लाभार्थियों/कर्मचारियों को भुगतान न कर, अन्य अपात्र व्यक्तियों के खातों में राशि स्थानांतरित किए जाने के आरोप प्रथम दृष्टया परिलक्षित होते हैं। उक्त कृत्य वित्तीय अनियमितता, शासकीय धन के दुरुपयोग, कर्तव्यहीनता एवं सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है, जो गंभीर प्रकृति का विषय है एवं जिसकी निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं तथ्यपरक जाँच अत्यावश्यक है।
सक्षम अधिकारियों से पांच बिंदुओं पर जांच के निर्देश, पत्र में सख्ती, जांच टीम ने भी लापरवाही की तो खेर नहीं
आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग के महाप्रबंधक द्वारा जारी आदेश में बहुत सख्ती बरती है जारी आदेश में जहां पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के आदेश जारी किए गए हैं वही पूरे प्रकरण की जांच करने वाली सक्षम अधिकारियों की टीम को भी लापरवाही बरतने पर कार्यवाही करने की सख्त चेतावनी दी गई है। आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग के जारी आदेश के अनुसार 5 बिंदुओं पर जांच होना है जिनमें मुख्य बिंदु प्रकरण की विस्तृत जाँच हेतु तत्काल एक स्वतंत्र जाँच समिति का गठन करने सहित समिति में प्रशासनिक, वित्तीय एवं तकनीकी अधिकारी सम्मिलित किए जाएँ, ताकि जाँच निष्पक्ष हो वही अहम पहलू को ध्यान रखते हुए जाँच के दौरान संबंधित सभी अभिलेखों/रिकॉर्ड, भुगतान विवरण, बैंक खातों, लाभार्थी सूची, आदेश पत्रों एवं फाइल नोटिंग का परीक्षण को जब्त करने के निर्देश दिए हैं तो प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध म.प्र. सिविल सेवा वित्तीय सेवा नियमों के अंतर्गत उचित विभागीय एवं विधिक कार्रवाई प्रारंभ करने सहित जाँच पूर्ण कर तथ्यात्मक, स्पष्ट एवं संस्तुतियों सहित प्रतिवेदन को निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रस्तुत करने के साफ साफ निर्देश दिए गए हैं।
इनका कहना
हमें जैसे ही पत्र प्राप्त हुआ है वैसे ही हमने जांच 6 सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है और जांच टीम में सिविल सर्जन सहित 5 अन्य डॉक्टरों की टीम शामिल है जिन्हें पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट अतिशीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं जैसे ही जांच टीम जांच प्रतिवेदन सौंपेगी ही वैसे ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। जो भी दोषी होगा निष्पक्ष रूप से कार्यवाही की जाएगी।
सुधीर कुमार डहरिया – मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सीहोर








