अब तक नहीं हुए भ्रष्टाचारियो के बयान, लीपापोती में लगा स्वास्थ विभाग
आष्टा/कमल पांचाल
हमेशा सुर्खियों में रहने वाले सिविल अस्पताल में आयुष्मान योजना प्रोत्साहन राशि (इनसेंटिव) घोटाले को उजागर हुए 20 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन अब तक 46 लाख रुपए से अधिक का घोटाला करने वाले आरोपियों पर नाही एफआईआर दर्ज की गई है नाही विभागीय कार्यवाही की जोहत उठाई जा रही है बस जांच के नाम का खेल शुरू कर पूरे मामले में अब तक खानापूर्ति की जा रही है जिससे जिले के स्वास्थ विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं लिहाजा ऐसे में जिम्मेदार स्वास्थ विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध नजर आती है आपको बता दें कि वर्ष 2017 से लेकर वर्ष 2023 तक
सिविल अस्पताल में पदस्थ फार्मासिस्ट स्टोर इंचार्ज प्रमोद परमार ने तत्कालीन लेखापाल एमएल वर्मा, तत्कालीन बीएमओ से साठगांठ कर सिविल अस्पताल में ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को मिलने वाले इनसेंटिव को गलत तरीके से धोखाधडी कर अपनी पत्नी सहित तीन करीबी रिश्तेदारों के खातों में डालकर 47 लाख रुपए से अधिक का घोटाला कर डाला है लिहाजा सीधे सीधे साफ तौर पर रिश्तेदारों के बैंक खातों मे ट्रांसफर की गई राशियों के बैंक स्टेटमेंट से भ्रष्ट कर्मचारी और अधिकारियों की कारगुजारियो उजागर होती है फिर भी स्वास्थ विभाग की मेहरबानी बनी होना मामले में लीपापोती की और इशारा करता है
20 दिन से पत्र – पत्र खेलता स्वास्थ विभाग,अब ऐसे शुरू हुआ जांच का खेल
आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि में हुए घोटाले के सामने आने के 20 दिनों बाद भी जिला प्रशासन या स्वास्थ विभाग ने अब तक भ्रष्ट आरोपियों पर एफआईआर दर्ज नहीं करवाई नाही शासकीय सेवा से बर्खास्त किया है ऐसे में अब आष्टा से भोपाल तक पहुंचे मामले के बाद जिले का स्वास्थ विभाग सिर्फ जांच के नाम पर खानापूर्ति करने में जुट गया है आपको बता दें की आयुष्मान योजना के इनसेंटिव की शिकायत सेवा निवृत शिशुरोग विशेषज्ञ डॉक्टर एके जैन ने 27 जनवरी को लिखित में स्थानीय बीएमओ को दर्ज कराई थी। इसके बाद बीएमओ अमित माथुर ने 31 जनवरी को आनन फानन में जिला स्वास्थ विभाग को पत्र लिखकर अवगत कराया।
जिसके बाद 2 फरवरी को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया ने आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग भोपाल को पत्र लिखा, इसके बाद 6 फरवरी को आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग भोपाल के महाप्रबंधक डॉक्टर नरेंद्र भयडीया ने सीहोर स्वास्थ विभाग को जांच के आदेश जारी किए , ऐसे में आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग भोपाल से आदेश जारी होते ही जिला स्वास्थ विभाग ने भी जोहमत उठाते हुए 10 फरवरी को 6 सदस्यीय जांच टीम गठित करने के आदेश जारी किए। लिहाजा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा गठित जांच टीम ने 13 फरवरी को सिविल सर्जन डॉक्टर उमेश श्रीवास्तव के नेतृत्व में जांच का खेल शुरू कर दिया।
तत्कालीन बीएमओ से लेकर कई डॉक्टर, कर्मचारी शामिल, अब सबूतों को नष्ट करने में जुटे
वर्ष 2017 से 2023 तक हुए इस घोटाले में जहां मुख्य रूप से फार्मासिस्ट स्टोर इंचार्ज प्रमोद परमार और तत्कालीन आयुष्मान मित्र जगदीश मेवाड़ा अपनी पत्नी और रिश्तेदारों के बैंक खातों में राशि ट्रांसफर करने से सीधे सीधे इस घोटाले में शामिल हैं तो वही शिकायतकर्ता डॉक्टर एके जैन को भी आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग के महाप्रबंधक डॉक्टर नरेंद्र भयडीया ने जांच के दायरे में खड़े कर दिया है तो वही तत्कालीन बीएमओ और लेखापाल की भी इस घोटाले में शामिल होने की पूरी संभावना है इसी के चलते जांच टीम भी तमाम तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों से जांच पड़ताल करने का खेल शुरू कर खानापूर्ति करने में जुटी है।
प्रमोद ने सीधे सीधे 27 लाख रुपए तो जगदीश ने 18 लाख रुपए की राशि की ट्रांसफर, फिर भी मेहरबानी

सिविल अस्पताल में पदस्थ फार्मासिस्ट स्टोर इंचार्ज प्रमोद परमार ने गलत तरीके से आयुष्मान योजना के इनसेंटिव को अपनी पत्नी दीक्षा परमार सहित अपने करीबी रिश्तेदार कांता परमार , शुभम परमार, बबीता परमार के बैंक खातों में डाल दी और यह राशि 27 लाख रुपए से अधिक की है वही एक और आरोपी जगदीश मेवाड़ा ने भी आयुष्मान योजना इनसेंटिव को अपने खातों में ट्रांसफर कर डाला है जिसमें 18 लाख रुपए से ज्यादा की राशि शामिल है जगदीश मेवाड़ा ने अलग अलग बैंक खातों में इन राशियों को ट्रांसफर किया है और इसमें 55000 हजार की राशि अपनी पत्नी सागर मेवाड़ा के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की है
और यह पूरा काला चिट्ठा 440 पेज की ट्रांजेक्शन लिस्ट में सीधे सीधे पूरी कहानी बया कर रहा है लेकिन भ्रष्ट सिस्टम है कि तत्काल कार्यवाही करने की बजाय अपने इन प्यादों को बचाने में जुट गया है ताकि इस खेल के मुख्य खिलाड़ियों को बचाया जा सके!

दो पूर्व BMO सहित लेखापाल को बयान के लिए बुलाया है-सिविल सर्जन
इस मामले में गठित 6 सदस्यीय जिला स्तरीय जांच टीम को लीड कर रहे सिविल सर्जन डॉक्टर उमेश श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए कहा कि हमने आयुष्मान घोटाले की जांच को आगे बढ़ाते हुए मामले से जुड़े तत्कालीन, अधिकारियों और कर्मचारियों को बयान के लिए सूचना भेजी और कल इनके बयान होना है अभी हमने पूर्व बीएमओ डॉक्टर प्रवीर गुप्ता, पूर्व बीएमओ डॉक्टर जी डी सोनी और तत्कालीन लेखापाल एमएल वर्मा को बुलाया है








