भ्रष्टाचार, लापरवाही के कई मामले उजागर, लेकिन प्रशासन सहित जिला प्रशासन भी मूक दर्शक बना,कार्रवाई नहीं होने से हौसले बुलंद
आष्टा ।
भ्रष्टाचार एवं शासकीय कार्यों में लापरवाही किस कदर जारी है उसके कई उदाहरण देखने को मिल जाएंगे।
भ्रष्टाचार, लापरवाही के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी सीहोर जिले में कलेक्टर सहित अन्य जिम्मेदार इन पर कार्रवाई करने को लेकर लाचार बने हुए हैं। दरअसल सीहोर जिले में इस समय भ्रष्टाचार चरम पर है। हालत ऐसे है की नेता हो या अधिकारी हर तरफ सिर्फ कमाई ही कमाई की तरफ नजर किए हुए हैं। यही कारण है कि जमीनी कार्यों पर किसी का भी ध्यान नहीं है। गौरतलब है की सीहोर जिला हमेशा से सरकार की प्राथमिकताओं में रहा है। दरअसल केंद्रीय कृषि मंत्री एवं 18 वर्षों से अधिक समय तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान का गृह जिला होने के कारण सीहोर हमेशा से प्राथमिकता वाला जिला रहा। यहां पर तैनात अधिकारियों में भी खौफ रहता था और वे जिम्मेदारी से कार्य करते थे, लेकिन इस समय सीहोर जिले में ऐसी स्थितियां बनी हुई हैं, जो इससे पहले यहां पर कभी नहीं रही। चाहे प्रदेश सरकार की योजनाएं हो, केंद्र सरकार की योजनाएं हों या फिर अन्य शासकीय कार्य बेहद संजीदगी एवं जिम्मेदारियों के साथ उन्हें किया जाता रहा है। वर्तमान की स्थितियां इससे एकदम अलग हैं। सीहोर जिला जहां योजनाओं को जमीन पर उतारने में फिसड्डी साबित हो रहा है तो वहीं सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निपटारे में भी लगातार रैंक गिर रही है। यदि भ्रष्टाचार करने वाले जिलों की रैंक जारी की जाए तो निश्चित रूप से सीहोर जिला अव्वल आएगा। फिलहाल तो यहां पर भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई की दरकार है। लिहाजा पूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान केंदीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले की तीन वर्षों में क्या गत हो गई है यह वर्तमान हालत देखकर ही अंदाजा लगा लीजिए।
जहां लगातार सीहोर जिले में भ्रष्टाचार के कई बड़े और संगीन मामले सामने आ रहे हैं लेकिन प्रशासन के नुमाइंदो के कानों में जू तक नहीं रेंग रही है हालत ऐसे है की भ्रष्टाचार को रोकने में क्षेत्रीय सांसद, विधायक भी लाचार नजर आ रहे हैं और कार्यवाही के नाम पर चुप्पी साधे बैठे हैं
आपको बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री वर्तमान केंदीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले की आष्टा नगर पालिका इन दिनों भ्रष्टाचार का गढ़ बनी हुई है और यह एक के बाद एक भ्रष्टाचार के बड़े मामले सामने आ रहे हैं आलम ऐसे हैं कि कई शासकीय योजनाओं में अफसरों और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर करोड़ों रुपए की बंदरबाट कर डाली है जिम्मेदारों की खामोशी के चलते हालत ऐसे है की आष्टा नगर पालिका में भ्रष्टाचारी दानव बेखौफ होकर जनता के पैसे को सीधा सीधा डकार रहे हैं और तो और पीएमओ कार्यालय तक शिकायत होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन भी कार्यवाही के नाम पर लीपापोती करने में लगा हुआ है यूं तो आष्टा नगर पालिका में बीते तीन वर्षों में कई योजनाओं को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाकर करोड़ों रुपए की बंदरबाट की गई है लेकिन ताजा मामले में अमृत योजना 2 के नाम जहां करोड़ों रुपए का खेल खेला गया है और उसकी शिकायत तो पीएमओ कार्यालय पहुंच गई है तो वही पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई की 64 लाख रुपए से अधिक की प्रतिमा में बड़ा भ्रष्टाचार किया गया है जिसके चलते इस प्रतिमा को लगे 2 वर्ष हो गए हैं लेकिन हर छोटे छोटे कार्यों का भूमिपूजन कर वाहवाही बटोरने वाली नपा अब तक इस अटल प्रतिमा का अनावरण तक नहीं कर पाई है और इसका सबसे बड़ा कारण जो सामने आ रहा है उसमें अटल प्रतिमा में हुए भ्रष्टाचार की भनक भाजपा के शीर्ष नेताओं तक पहुंचना भी है जिसके कारण कोई भी मंत्री या नेता भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी इस अटल प्रतिमा का अनावरण नहीं करना चाहता है अब शहर सहित पूरे जिले में कांग्रेस भी इस अटल प्रतिमा का मुद्दा उठा रही है और आने वाले दिनों में धरना प्रदर्शन कर आंदोलन कर भाजपा को घेरने की रणनीति बना रही है वही अब शहर की जनता भी ईमानदार सांसद होने का दावा करने वाले क्षेत्रीय सांसद महेंद्र सोलंकी और स्थानीय विधायक गोपाल इंजिनियर पर भ्रष्टाचार के आगे लाचार होने के आरोप लगाते हुए कह रही है की वर्षो बाद शहर की जनता ने भाजपा पर भरोसा जता कर नगर पालिका में बिठाया था और स्मार्ट सिटी के सपने संजोए थे लेकिन स्मार्ट शहर बनाने के बजाय भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने स्मार्ट तरीके से भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड तोड़ दिए है जबकि स्थानीय भाजपा मंडल अध्यक्ष अंजनी विशाल चौरसिया स्वयं नगर पालिका में शासकीय योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर आवाज उठा चुकी है ऐसे में सांसद, विधायक इतने लाचार हो गए है कि भ्रष्टाचार दानवों पर कार्यवाही नहीं करवा पा रहे है!







