आष्टा/कमल पांचाल
शहर में नियमों को ठेंगा दिखाते हुए बिना मापदंड के कई निजी अस्पतालों से लेकर, मेडीकल स्टोर्स, पैथालाजी सेंटर धड़ल्ले से संचालित किए जा रहे हैं ऐसे में शहर भर में धड़ल्ले से संचालित हो रहे निजी अस्पतालों के पास न तो प्रशिक्षित चिकित्सक हैं और न ही स्वास्थ्य कर्मी, नाही स्वास्थ विभाग के मापदंडों पर ये खरे नहीं उतर रहे हैं फिर भी बुखार से लेकर कई बड़े बड़े ऑपरेशन तक का जिम्मा उठाकर मरीजों की जान जोखिम में डालने से नहीं चूकते हैं। ऐसा भी नहीं कि इन निजी अस्पतालों के बारे में जिले का स्वास्थ विभाग या प्रशासन बेखबर है लेकिन कुंभकर्ण की तरह आंखे मूंदे सोए स्वास्थ विभाग के जिम्मेदार अफसरों की मेहरबानी के बिना कुछ भी संभव नहीं है।
जिसके चलते इन निजी अस्पतालों में कई मरीज अपनी जान तक गंवा चुके हैं और कार्यवाही के नाम पर सिर्फ ढांक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ होती है और यह तक की स्थानीय स्वास्थ विभाग की कार्यवाहियों पर जिला स्वास्थ विभाग कवच का काम करता है नतीजा यह है कि अब तक लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाले इन निजी अस्पतालों पर कोई ठोस कार्यवाही देखने को नहीं मिली है और यदि स्थानीय स्वास्थ विभाग ने प्रशासन के दबाव यह पीड़ित की शिकायत पर कोई कार्यवाही कर अस्पताल को सील कर भी दिया तो बेशर्म जिला स्वास्थ विभाग उसे फिर क्लीन चिट देकर खुलवा देता है।
कुकुरमुत्ते की तरह खुले प्रायवेट क्लिनिक और पैथोलॉजी लेब, बेशर्म बना स्वास्थ विभाग
निजी अस्पतालों के अलावा शहर से लेकर गांव से तक कुकुरमुत्ते की तरह प्रायवेट क्लीनिक,पैथालाजी सेंटर भी धड़ल्ले से बिना मापदंड के संचालित हो रहे हैं। और तो और कई ऐसे भी हैं, जो आगे मेडिकल की दुकान चला रहे हैं और पीछे दो कमरों में पूरा नर्सिंग होम संचालित कर रहे हैं। इन अस्पतालों में कोई डिग्री धारक चिकित्सक भी नहीं है लेकिन हर तरह के मरीजों को भर्ती कर उनका आर्थिक शोषण के अलावा जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। और इन निजी प्रायवेट क्लिनिको में स्वास्थ्य विभाग के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाकर आम लोगों के जीवन के साथ छोलाछाप डॉक्टर खिलवाड़ कर रहे हैं। यहां तक कि कई निजी चिकित्सक तो ऐसे हैं जिन्होंने अपने घर को ही अस्पताल बना रखा है। जहां आने वाले मरीजों के स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ उन्हें भर्ती किया जाकर उनका उपचार किया जा रहा है। इतना सबकुछ चलते हुए भी अब तक इस दिशा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
जिससे स्थानीय स्वास्थ विभाग सहित जिले के स्वास्थ विभाग की बेशर्मी देखने को मिलती है।
जिला स्वास्थ विभाग ने पल्ला झाड़,खानापूर्ति करने 6 सदस्यीय निरीक्षण टीम बनाई

शहर में निजी अस्पतालों में मरीजों की जान से खिलवाड़ करने के कई मामले सामने आए हैं वही कई मामलों में तो मरीज इन प्रायवेट अस्पतालों की लापरवाही के चलते अपनी जान तक गंवा बैठे हैं ऐसे स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ विभाग ने कार्यवाही कर अस्पताल को सील कर ठोस कार्यवाही करने का प्रयास किया तो जिला स्वास्थ विभाग में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों ने क्लीन चिट देते हुए वापस इन अस्पतालों को खुलवा दिया है लिहाजा अब जिला स्वास्थ विभाग ने इस बार पल्ला झाड़ते हुए 6 सदस्यीय स्थानीय स्वास्थ विभाग की टीम बनाई है जिसमें तीन अनुभवी डॉक्टरों को शामिल किया है जो शहर के निजी अस्पतालों की जांच करेगी ।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार गठित 6 सदस्यीय जांच टीम में डॉ. अमित गणेश माथुर मुख्य खण्ड चिकित्सा अधिकारी सिविल अस्पताल आष्टा,डॉ भूपेंद्र परमार, सर्जिकल स्पेस्लिस्ट,डॉ जयदीप सिसोदिया, निश्चेतना विशेषज्ञ, जितेंद्र वर्मा, सहायक अस्पताल प्रबंधक,मोहन श्रीवास्तव,सुरेश सेन, नेत्र चिकित्सा सहायक शामिल हैं।
लिहाजा अब देखना लाजमी होगा यह टीम शहर की जनता के विश्वास पर कितना खरा उतरती है या फिर वही दिखावे की कार्यवाही कर खानापूर्ति करती है।







