सीहोर का भ्रष्ट स्वास्थ विभाग अपने प्यादों को बचाने में जुटा,एक महीना बीतने को जांच के नाम पर खानापूर्ति,सबूतों को नष्ट करने में जुटे आरोपी
सीहोर/कमल पांचाल
जिले में नर्सिंग घोटाला हो या जिले के निजी अस्पतालों को बिना मापदंड के मान्यता देने का मामला हो जिले के स्वास्थ विभाग की कारगुजारियां किसी से छुपी नहीं है कुल मिलाकर सीहोर जिले के स्वास्थ्य अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त रहे हैं जिससे सीहोर जिले का स्वास्थ्य विभाग हमेशा सुर्खियों में रहता है ताजा मामला केंद्र की आयुष्मान योजना में हुए घोटाले से जुआ हैं जहां आष्टा, जावर से लेकर भोपाल तक हड़कंप मचा हुआ है वैसे मजेदार बात यह है कि सिर्फ हड़कंप ही मचा हुआ है क्योंकि भ्रष्टाचारीयो को कार्यवाही का कोई खौफ नहीं है नतीजा सरकारी भ्रष्ट स्वास्थ अधिकारी, कर्मचारी आयुष्मान योजना को भी नहीं छोड़ रहे हैं गौरतलब है कि
सिविल अस्पताल आष्टा में आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि के नाम पर हुए वित्तीय घोटाले का मामला जोर पकडता जा रहा है, तो वहीं जिम्मेदार स्वास्थ अधिकारी घोटाले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं लिहाजा जिले का भ्रष्ट स्वास्थ विभाग आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग के आदेश को भी ठेंगा दिखाते हुए नजर आ रहा है । बता दें कि सिविल अस्पताल आष्टा में आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि के नाम पर किए गए 46 लाख रुपए से अधिक की राशि सिविल अस्पताल के ही कर्मचारी और अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर सीधे सीधे सरकारी राशि को हजम कर लिया गया था। इस बात का खुलासा सेवा निवृत शिशुरोग विशेषज्ञ डॉक्टर एके जैन की शिकायत होने के बाद आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग भोपाल के महाप्रबंधक डॉक्टर नरेंद्र भयडीया ने निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कर तत्काल कार्यवाही के लिए 6 फरवरी को सीहोर जिले के स्वास्थ विभाग को आदेश पत्र जारी किया था। ऐसे में सीहोर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया ने 10 फरवरी को 6 सदस्यीय जांच टीम गठित की थी।
लेकिन घोटाला उजागर हुए एक माह और आयुष्मान विभाग के आदेश को जारी हुए 15 दिनों से ज्यादा का समय बीत चुका है फिर भी भ्रष्ट स्वास्थ विभाग की मेहरबानी से अब तक 46 लाख रुपए से अधिक का घोटाला करने वाले दोषी कर्मचारी और अधिकारियों पर कोई कार्यवाही देखने को नहीं मिली है।
जिससे आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग पर जिले का स्वास्थ विभाग भारी पड़ता हुआ नजर आ रहा है और पूरे मामले में जांच के नाम लीपापोती करने में जुट गया है।
आयुष्मान विभाग ने भी प्रथम दृष्टि माना था अपराध, कार्यवाही का दिया था आदेश
सिविल अस्पताल में आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि में 46 लाख रुपए से अधिक की गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग भोपाल के महाप्रबंधक डॉक्टर नरेंद्र भयडीया ने 6 फरवरी को सीहोर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया को प्रोत्साहित राशि में की गई अनियमितता की जांच के लिए समिति गठित करने के लिए आदेश जारी किए थे। जिसमें आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग भोपाल ने सख्ती दिखाते हुए स्पष्ट रूप से लिखा था कि सिविल अस्पताल आष्टा में पदस्थ डॉक्टर एके जैन सहित अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा आयुष्मान भारत नीरामयम के अंतर्गत शासकीय राशि के भुगतान में गंभीर अनियमितता की गई है जिनमें पात्र लाभार्थियों, कर्मचारियों को भुगतान न कर अन्य अपात्र व्यक्तियों के खातों में प्रथम दृष्टि में राशि ट्रांसफर किया जाना पाया गया है उक्त कृत्य वित्तीय अनियमितता, शासकीय धन के दुरुपयोग, कर्तव्यहीनता एवं सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है, जो गंभीर प्रकृति का विषय है एवं जिसकी निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं तथ्यपरक जाँच कर कार्यवाही करना सुनिश्चित किया गया था।
महाप्रबंधक ने दी थी सख्त हिदायत, फिर भी जांच में लापरवाही
आयुष्मान विभाग के महाप्रबंधक डॉक्टर नरेंद्र भयडीया द्वारा सीहोर स्वास्थ विभाग को जारी आदेश में कई बिंदुओं पर जांच कराई जाने सहित लापरवाही और कार्यवाही में देरी न बरतने की सख्त हिदायत देते हुए उल्लेख किया था कि समिति में प्रशासनिक, वित्तीय एवं तकनीकी अधिकारी सम्मिलित हो ताकि जाँच निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से की जा सके साथ ही जाँच के दौरान संबंधित सभी अभिलेखों/रिकॉर्ड, भुगतान विवरण, बैंक खातों, लाभार्थी सूची, आदेश पत्रों एवं फाइल नोटिंग का परीक्षण हो वही प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 तथा अन्य प्रचलित वित्तीय सेवा नियमों के अंतर्गत उचित विभागीय एवं विधिक कार्रवाई प्रारंभ की जाए। लिहाजा प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए प्रकरण में किसी भी स्तर पर शिथिलता, लापरवाही अथवा अनावश्यक विलंब को गंभीर कदाचार की श्रेणी में मानते हुए कार्यवाही सुनिश्चित न किए जाने अथवा विलंब की स्थिति में संपूर्ण उत्तरदायित्व जांच टीम को माना गया था। लेकिन आयुष्मान भारत नीरामयम विभाग के जारी इस आदेश को सीहोर के स्वास्थ विभाग और जांच टीम ने ताक पर रख दिया है ऐसे में आयुष्मान विभाग के महाप्रबंधक डॉक्टर नरेंद्र भयडीया के इस आदेश के 15 दिनों बाद भी जांच टीम दोषियों पर कार्रवाई करना तो दूर की बात जांच के निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है जबकि प्रथम दृष्टि में स्पष्ट नजर आ रहा है कि सिविल अस्पताल के कर्मचारी और अधिकारियों ने साठगांठ कर आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि को पात्र लाभार्थियों के बजाय अपात्र अपने करीबी रिश्तेदारों के बैंक खातों में सीधे सीधे ट्रांसफर कर दी है और 440 पन्नों की ट्रांजेक्शन लिस्ट इस गड़बड़ झाले की कहानी को बया कर रहा है वही यह राशि बैंक टू बैंक ट्रांसफर की गई है जिसमें सरकारी अस्पताल में पदस्थ फार्मासिस्ट स्टोर इंचार्ज प्रमोद परमार, आयुष्मान मित्र जगदीश मेवाड़ा, तत्कालीन बीएमओ, तत्कालीन लेखापाल की सीधी सीधी अहम भूमिका है लेकिन इसके बावजूद कार्यवाही करने की बजाय जांच टीम अब जांच के नाम पर खानापूर्ति करने में जुटी है जबकि यह शासकीय राशि और वित्तीय अनियमितता से जुड़ा हुआ सीधा मामला है जिसमें तत्काल आरोपियों को बरखास्त कर पुलिस में एफआईआर दर्ज करना था, लेकिन कार्यवाही के नाम नील बटे सन्नाटा नजर आ रहा है जिससे आरोपी अब सबूतों को नष्ट करने में जुट गए हैं
इस दौरान हमने जांच टीम को लीड कर रहे सिविल सर्जन डॉक्टर उमेश श्रीवास्तव और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुधीर डहरिया को कॉल कर जानकारी लेना चाही तो उन्होंने हमारा कॉल उठाना जरूरी नहीं समझा जिससे मामले में जिले के इन जिम्मेदार स्वास्थ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं।






